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अरडू (Ailanthus excelsa Roxb.) के क्लोनल प्रवर्धन हेतु
ग्राफ्टिंग तकनीक का विकास।
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मरुस्थलीय नगरों के उपनगरीय क्षेत्रों में सौंदर्य वृद्धि एवं ईंधन
लकड़ी की उपलब्धता बढ़ाने हेतु वनीकरण में अपशिष्ट जल का उपयोग।
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भूमि उत्पादकता बढ़ाने तथा मरुस्थलीकरण से मुकाबला करने हेतु बीज
बुवाई द्वारा अवनत भूमि का पुनर्वास।
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उष्ण शुष्क क्षेत्रों में रेत के बहाव को नियंत्रित करने एवं बालू
टीलों को स्थिर करने हेतु सतही वनस्पति का उपयोग।
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वनीकरण एवं वर्षा जल संचयन के माध्यम से अवनत पहाड़ियों का
पुनर्वास।
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शुष्क क्षेत्रों में विपरीत मौसम के दौरान चारे की उपलब्धता बढ़ाने
हेतु सिल्वी-पाश्चर प्रणाली।
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कैपेरिस डेसिडुआ (Capparis decidua) के बीजों के अंकुरण हेतु
प्रोटोकॉल।
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गुग्गुल (Commiphora wightii Arn. Bhandari) के बीजों के कटाई
उपरांत उपचार एवं अंकुरण क्षमता में वृद्धि।
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मृदा नमी संरक्षण एवं पौधों की वृद्धि बढ़ाने हेतु मल्चिंग एवं
खरपतवार नियंत्रण।
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वृक्षारोपण स्थापना हेतु सूक्ष्म जलग्रहण संरचनाएँ।
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मरुस्थलीय क्षेत्रों की जनसंख्या हेतु प्रोटीन-समृद्ध खाद्य
अनुपूरक।
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राजस्थान के महत्वपूर्ण औषधीय पौधों में द्वितीयक उपापचयों की
अधिकतम प्राप्ति हेतु उपयुक्त कटाई समय।
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राजस्थान एवं गुजरात में कुछ वन वृक्षारोपणों के सतत प्रबंधन हेतु
वृद्धि एवं उत्पादन मॉडल।
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वन नर्सरियों में पौध सामग्री की गुणवत्ता सुधार हेतु VAM का
पृथक्करण एवं बड़े पैमाने पर संवर्धन।
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जैव-निकास (Biodrainage) सिद्धांत का उपयोग करते हुए आईजीएनपी
(IGNP) कमांड क्षेत्र की जलभरावग्रस्त भूमि का सुधार एवं पुनर्वास।
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गुजरात एवं राजस्थान के उष्ण शुष्क क्षेत्रों हेतु खेजड़ी
(Prosopis cineraria) आधारित कृषि वानिकी प्रणाली।
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राजस्थान की जैव विविधता पर पूर्ण फिल्म।
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