आनुवंशिकी एवं वृक्ष सुधार प्रभाग
परिचय
आनुवंशिकी एवं वृक्ष सुधार प्रभाग भारत के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वन आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, अभिलक्षणन, सुधार तथा सतत उपयोग से संबंधित बहुविषयक अनुसंधान कार्यों में संलग्न है। यह प्रभाग आनुवंशिक विविधता, प्रजाति-उद्गम (प्रोवेनेंस) मूल्यांकन, बीज स्रोत सुधार, वृक्ष प्रजनन तथा संरक्षण जीवविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करता है। इसके अंतर्गत खेजड़ी (Prosopis cineraria), रोहिड़ा (Tecomella undulata), नीम (Azadirachta indica), चंदन (Santalum album) जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों के साथ-साथ गुग्गुल (Commiphora wightii), कुटकुरा/कदाया (Sterculia urens), पीलू (Salvadora persica) तथा कारालुमा (Caralluma edulis) जैसी औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियों पर भी अध्ययन किया जाता है। प्रभाग ने कैंडिडेट प्लस ट्री (CPT) चयन, संतति एवं प्रोवेनेंस परीक्षणों तथा उन्नत आणविक मार्कर प्रणालियों एवं तुलनात्मक जीनोमिक्स तकनीकों के उपयोग द्वारा श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म की पहचान एवं बीज उत्पादन क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रभाग आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी एवं आणविक जीवविज्ञान सुविधाओं से सुसज्जित है, जिसमें सूक्ष्म प्रवर्धन (माइक्रोप्रोपेगेशन), इन-विट्रो संरक्षण तथा आनुवंशिक रूपांतरण हेतु एक सुविकसित ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर) प्रयोगशाला भी शामिल है। अनुसंधान गतिविधियाँ शुष्क क्षेत्रों की वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण, जैवरासायनिक प्रोफाइलिंग तथा अजैविक तनाव सहनशीलता के अध्ययन पर भी केंद्रित हैं। प्रभाग ने नीम, चंदन, बाँस तथा वन आनुवंशिक संसाधनों से संबंधित राष्ट्रीय अनुसंधान कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाई है। पारंपरिक प्रजनन, जैव-प्रौद्योगिकी, आणविक आनुवंशिकी तथा संरक्षण रणनीतियों के समन्वित उपयोग के माध्यम से यह प्रभाग वन उत्पादकता बढ़ाने, आनुवंशिक विविधता के संरक्षण, रोपण सामग्री की गुणवत्ता में सुधार तथा जलवायु-अनुकूल एवं सहनशील पौध सामग्री के विकास द्वारा शुष्क पारिस्थितिक तंत्रों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।
उद्देश्य
1. शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों के वन आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण एवं सतत उपयोग।
2. भविष्य के वृक्ष प्रजनन एवं सुधार कार्यक्रमों हेतु आनुवंशिक विविधता का संरक्षण।
3. विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के लिए उपयुक्त श्रेष्ठ उद्गम-स्थानों (प्रोवेनेंस) एवं बीज स्रोतों का मूल्यांकन एवं चयन।
4. चयन, प्रजनन एवं जैव-प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री का विकास।
5. ऊतक संवर्धन एवं वानस्पतिक प्रवर्धन तकनीकों द्वारा तीव्र एवं प्रभावी सामूहिक प्रवर्धन (Mass Multiplication) प्रोटोकॉल का विकास।
6. आनुवंशिक विविधता एवं तनाव सहनशीलता तंत्र की समझ के लिए आणविक मार्करों, जीनोमिक्स तथा उच्च-थ्रूपुट तकनीकों का उपयोग।
7. आनुवंशिक अभियांत्रिकी एवं उन्नत प्रजनन तकनीकों के माध्यम से जलवायु-सहिष्णु, रोग-प्रतिरोधी एवं उच्च उत्पादकता वाली रोपण सामग्री का विकास।
8. दुर्लभ, संकटग्रस्त, विलुप्तप्राय एवं आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण औषधीय पादप प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रवर्धन।
अनुसंधान की प्रमुख उपलब्धियाँ
जीन माइनिंग एवं जैव-सूचना विज्ञान (बायोइन्फॉर्मेटिक्स)
गुग्गुल बायोरिएक्टर
गुग्गुल हेतु सोमैटिक एम्ब्रायोजेनेसिस एवं ऊतक संवर्धन प्रोटोकॉल
हेलोफाइट पौधों में जीन अभिव्यक्ति
राजस्थान की 6 महत्त्वपूर्ण प्रजातियों के संभावित बीज स्रोतों की पहचान
नीम का आनुवंशिक मानचित्रण (Genetic Mapping)
कनासर, फलोदी में चंदन परीक्षण
रोहिड़ा (Tecomella undulata) पैनल
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परियोजनाएँ
लोग
| क्र. सं. | अधिकारी का नाम | पदनाम | आधिकारिक ईमेल | ईपीएबीएक्स |
|---|---|---|---|---|
| डॉ. तरुण कांत | वैज्ञानिक जी | tarunkant@cfre.org | 2729136 | |
| डॉ. देशा मीणा | विभाग प्रमुख एवं वैज्ञानिक ई | desha@icfre.org | 2729138 | |
| डॉ. अंजलि जोशी | वैज्ञानिक सी | ajoshi@icfre.org | 2729130 | |
| डॉ. अदिति टेलर | वैज्ञानिक सी | atailor@icfre.org | 2729128 | |
| श्री करणा राम चौधरी | मुख्य तकनीकी अधिकारी एवं पॉलीहाउस प्रभारी | krchoudhary@icfre.org | 2729126 | |
| श्री थानाराम राठौड़ | मुख्य तकनीकी अधिकारी | trrathore@icfre.org | 2729126 | |
| श्री जयप्रकाश दाधीच | वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी | jdadich@icfre.org | 2729127 | |
| श्री अशोक के. परमार | वरिष्ठ तकनीशियन | parmarak@icfre.org | 2729127 | |
| श्री राजा राम | बहु-कार्य कर्मचारी | rajaram_mts@icfre.org | 2729127 |